Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 119
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 119 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 119
संस्कृत श्लोक
न देवः कमलोद्भूतो न देवस्त्रिदशेश्वरः ।
न देवः पवनो नार्को नानलो न निशाकरः ॥ ११९ ॥
हिन्दी अर्थ
न तो कमलोद्भव ब्रह्माजी देवता हैं और न
सर्वदेवताओं के अधिपति इन्द्र ही देवता हैं न पवन, न सूर्य, न अग्नि ओर न निशाचर (चन्द्रमा)
ही वास्तव में देवता हे । (प्रकृत श्लोक मेँ निशाकर शब्द चन्द्रकला के अधीन शरीरवाले तैतीस
करोड देव-शरीरों का उपलक्षण हे ।)