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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 110

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 110 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 110

संस्कृत श्लोक

त्वदनुस्मरणैकान्तधियो यत्र स्थिता जनाः । फलं भूतस्य पुण्यस्य वर्तमानस्य सेचनम् ॥ ११० ॥

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो, आपका अनुस्मरण पूर्वसंचित पुण्य-वृक्ष के फल को अनन्तकोटि गुना बढ़ा देता हे, वर्तमान देह से उत्पादित पुण्य-वृक्ष का मानों अमृतसिंचन द्वारा अभिवर्धन करता है और करिष्यमाण (किये जानेवाले) पुण्य की अभिवृद्धि के लिए बीज का विस्तार करता है