Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 109
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 109 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 109
संस्कृत श्लोक
न ते सन्ति जगत्कोशे प्रणमन्ति न ये पुनः ।
ते देशास्ते जनपदास्ता दिशस्ते च पर्वताः ॥ १०९ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, एकमात्र आपके अनुस्मरण में निरन्तर जिनका मन
लगा रहता है, ऐसे पुरुष जहाँ स्थित रहते हैं, वे ही देश, वे ही जनपद, वे ही दिशाएँ ओर वे ही पर्वत
प्रशस्ततम हैं