Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 88
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 88 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 88
संस्कृत श्लोक
अज्ञाननिद्रालुठनस्वभावात्मकमच्युतम् ।
संसारस्वप्नसंभ्रान्तो भवानयमिह स्थितः ॥ ८८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, उस घन अज्ञानरूपी विस्तृत इस निद्रा का आप उस प्रकार परित्याग कर
दीजिए, जिस प्रकार निधि (संपत्ति) प्राप्त करनेवाला भाग्यवान पुरुष दरिद्रता का परित्याग कर देता
है