Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
आस्थानास्थे परित्यज्य लीलयैव महाधिया ।
आभासमात्रमेवेदं यस्य च प्रतिभासते ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह दृश्यमान प्रपंच केवल आभासमात्र (झलकमात्र) ही है, इस प्रकार जिस महामति को
भलीर्भोति अवगत हो जाता है, वह अपने भीतर उस प्रकार शीतल हो जाता है, जिस प्रकार सूर्य प्रकाश
के शान्त हो जाने पर भूमण्डल शीतल हो जाता है