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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 54

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

इति बन्धुवियोगेषु किं वृथा परितप्यसे । अवश्यमेव च मया मर्तव्यमिति निश्चयः ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

अज्ञानदशा में अपने मरण की आशंका से होनेवाला सन्ताप भी इसी उपाय से निवृत्त हो सकता है, इस आशय से कहते हैं। हमें भी अवश्य ही मरना है, यह अटल निश्चय है, इसलिए अपने मरण का समय उपस्थित होने पर क्यों व्यर्थ खिन्न होते हैं ?