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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

तत्सर्वं चित्तवीर्यस्य संकल्पस्य विजृम्भितम् । दीर्घस्वप्नमिमं विद्धि दीर्घं वा चित्तविभ्रमम् ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

जाग्रत देहादि में स्वप्न देहादि से जो पार्थक्य प्रतीत होता है, वह एकमात्र दीर्घकालानुवृत्ति से ही होता है, न कि सत्यत्व, संकल्पजनितत्व आदि से, इस आशय से कहते हैं। हे रघुनन्दन, आप इस संसार को एक तरह का दीर्घ स्वप्न, दीर्घ चित्तविभ्रम या दीर्घ मनोराज्य ही समझिए