Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
त्यज संकल्पनिर्माणदेहाः सन्ति सहस्रशः ।
सुखतल्पगतो येन स्वप्नदेहेन दिक्तटान् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पजनित देहों की ही उदाहरणपूर्वक असत्यता बतलाते हैं।
हे श्रीरामजी, भला यह आप बतलाइए कि सुखशय्या पर सोये हुए आप जिस स्वप्न-देह से
विविध दिशामण्डल में परिभ्रमण करते हैं, वह आपकी देह किस स्थान में स्थित है ?