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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

स्वप्ने स्वप्नावबोधः संस्त्वन्यदा स मुधैव हि । बुद्बुदो बुद्बुदविधौ सत्यो मिथ्यैव चान्यदा ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

असत्‌ में सत्त्व का भ्रम कहाँ देखा गया है, इस शंका पर कहते हैं। स्वप्न-दशा में ही प्रतीयमान स्वाप्निक पदार्थ सत्‌-से प्रतीत होते हैं और दूसरे समय में स्वाप्निक पदार्थ मिथ्या ही हैं। बुद्बुदं के साक्षात्कार के समय बुद्बुदे सत्य-से प्रतीत होते हैं, पर दूसरे समय में तो वे मिथ्या ही हैं