Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एवं भुशुण्डवृत्तान्तः कथितस्ते मयानघ ।
अनया प्रज्ञया तीर्णो भुशुण्डो मोहसंकटात् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
वर्णित भुश्ुण्डाख्यायिका का उपक्रान्त उपदेश के साथ सम्बन्ध वतलाते है ।
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे निष्पाप श्रीरामजी, इस प्रकार का भुशुण्डवृत्तान्त मैने आपसे
कहा । आख्यायिका में वर्णित इसी तात्त्विक बुद्धि के कारण मोहसंकट से भुशुण्ड तैर गया था
सर्ग सन्दर्भ
सत्ताईसवाँ सर्ग समाप्त अट्टाईसवाँ सर्ग भुशुण्डाख्यायिका का सम्बन्ध, देह की अनिश्चितता तथा देहादि में आपाततः भ्रान्तिरूपता का वर्णन ।