Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
श्रीवाल्मीकिरुवाच ।
इति सुमतिभुशुण्डसत्कथां यो विमलमतिः प्रविचारयिष्यतीह ।
भवभयबहुलाकुलास्थितां स प्रसभमसत्सरितं तरिष्यतीति ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : इस प्रकार
की बुद्धिमान भुशुण्ड की उत्तम कथा का जो विशुद्धमति महात्मा भली प्रकार विचार करेगा, वह इसी
शरीर में जन्मादि भयो से मलिन अतएव व्याकुल जीवों के द्वारा व्याप्त हुई इस माया-नदी को बलात्
पार कर जायेगा