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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 27

20 verse-groups

  1. Verse 1छब्बीसवाँ सर्गे समाप्त यत्ताईसवाँ सर्ग जाने की इच्छा कर रहे वसिष्ठजी द्वारा भुशुण्ड की प्…
  2. Verse 2महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे ऐश्वर्यपूर्ण पक्षिराज, कितने हर्ष का विषय है कि आपने अपने प्र…
  3. Verse 3पक्षिराज, वे महात्मा धन्य हैं, जो दूसरे ब्रह्मदेव के समान स्थित अत्यन्त दीर्घजीवी आपके दर…
  4. Verse 4हे पक्षिराज, ये मेरे नेत्र भी धन्य हैं जो तब से लेकर अब तक आपके दर्शन करते रहे। आपने बुद्…
  5. Verse 5वायसराज, मैंने सब दिशाओं में परिभ्रमण किया और देवताओं एवं बड़े-बड़े तत्त्ववेत्ताओं की ज्ञ…
  6. Verse 6वायसराज, प्रयत्न से दीर्घकाल तक परिभ्रमण कर कोई किसी महाव्यक्ति को किसी तरह प्राप्त कर सक…
  7. Verse 7जिस प्रकार एक बाँस के वन में कहीं-कहीं ही मोती उत्पन्न होता है, वैसे ही आपके सदृश ज्ञानी…
  8. Verse 8भुशुण्डजी, पुण्य-देह एवं विमुक्तात्मा आपका जो यह अवलोकन किया, उससे मैंने तो आज अत्यन्त कल…
  9. Verse 9पक्षिराज, तुम्हारा कल्याण हो, तुम अपनी शुभ गुहा में प्रवेश करो, अब मध्याह-कर्तव्य के लिए…
  10. Verse 10(सुवर्णपल्लवमय पात्रका) ग्रहण किया
  11. Verse 11तदनन्तर पूर्णप्रज्ञ उस वायसराज ने कल्पवृक्ष की लता के पुष्प केसरो से युक्त हिम के सदृश का…
  12. Verse 12श्रीरामजी, उक्त अर्घ्य, पाद्य और पुष्प से संसार में सबसे पहले उत्पन्न हुए यानी चिरन्तन इस…
  13. Verse 13तदनन्तर हे खगेन्द्र, आप मेरे पीछे चलने के लिए अधिक श्रम न करें । इस प्रकार कहता हुआ मैं आ…
  14. Verse 14हे श्रीरामजी, मेरे पीछे-पीछे अनुगमन द्वारा आकाश में वह पक्षिराज एक योजन तक चलता रहा । इसक…
  15. Verse 15क्षणभर में ही मेँ आकाशमार्ग में जब अदृश्य हो गया, तभी वह पक्षिराज अपने स्थान के लिए लौटा…
  16. Verse 16हे श्रीरामजी, आकाशमार्ग में कुछ दूर जाकर, समुद्र में तरंग की नाई, हम दोनों ही एक दूसरे के…
  17. Verses 17–18उक्त भुशुण्ड-संगति का समय कहते है। श्रीरामजी, सत्ययुग के प्रथम दो शतक जब व्यतीत हो चुके थ…
  18. Verse 19हे श्रीरामजी, आजकल वर्तमान समय में सत्ययुग क्षीण होने पर त्रेतायुग चल रहा है ओर हे रिपुमर…
  19. Verse 20उपसंहार करते है। हे श्रीरामजी, इस प्रकार का विचित्र उत्तम भुशुण्ड-वृत्तान्त मैने आपसे कहा…
  20. Verse 21श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : इस प्रकार की बुद्धिमान भुशुण्ड की उत्तम कथा का जो विशुद्धमति महात…