Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आपादमस्तकान्तेऽस्मिन्न देहे ममता मम ।
त्यक्ताहंकारपङ्कस्य तेन जीवाम्यनामयः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, मैंने अहंकाररूपी कीचड़ का परित्याग कर दिया
है । इसलिए पैर से लेकर मस्तक तक इस देह में मुझे ममता नहीं है, यही कारण है कि मैं सब तरह के
विकारों से रहित होकर जी रहा हूँ