Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 68

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 68

संस्कृत श्लोक

अपानोऽस्तं गतो यत्र प्राणो नाभ्युदितः क्षणम् । कलाकलङ्करहितं तच्चित्तत्त्वमुपास्महे । नापानोऽभ्युदितो यत्र प्राणश्चान्तमुपागतः । नासाग्रगगनावर्तं तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसमें अपानवायु अस्त हो जाता है और जिसमें तनिक भी प्राण का अभ्युदय नहीं होता, उस समस्त कल्पना कलंकों से निर्मुक्त चित्तत््व की हम लोग उपासना करते हैं {} जिसमें अपान का अभ्युदय नहीं होता और प्राण का अंत हो जाता है तथा जिसकी नासिका के अग्रभाग से उपलक्षित बारह अंगुल परिमित गगन सन्धि (प्राणापानप्रवाहसन्धि) है, उस चित्तत्व की हम उपासना करते हैं