Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
यस्मिन्सर्व यतः सर्वं यत्सर्वं सर्वतश्च यत् ।
यच्च सर्वमयं नित्यं तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें यह समस्त पुरोवर्ती पदार्थ विद्यमान हैं, जिससे समस्त
जगत उत्पन्न हुआ है, जो सर्वात्मक है, जो चारों ओर स्थित है और जो सर्वमय है, हम लोग उस
चैतन्यात्मक तत्त्व की निरन्तर उपासना करते हैं