Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
प्राणापानस्वभावांस्तमबुद्ध्वा भूयो न जायते ।
अष्टावेते महाबुद्धे रात्रिदिवमनुस्मृताः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे, ये देहवायु के स्वभावभूत बाह्य एवं आन्तर रेचक आदि के भेद
से आठ प्रकार के प्राणायाम हैं, उनका रात-दिन निरन्तर अनुध्यान करने से पुरुष की अवश्य मुक्ति हो
जाती है, यह मेरा कथन है