Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तं बाह्यपूरकं त्वाद्यं विदुर्योगविदो जनाः ।
नासाग्रादपि निर्गत्य द्वादशान्तावधिर्गतिः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उससे बाहर हुई वायुगति की दूसरे बाह्यपूरकरूप से कल्पना करते हैं।
नासिका के अग्रभाग से भी निकलकर बारह अंगुलपर्यन्त जो प्राण-वायु की गति है, वह दूसरा
बाह्यपूरक है, यों योगशास्त्र के विद्वान कहते हे