Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पद्मयुग्मत्रयं यन्त्रमस्थिमांसमयं मृदु ।
ऊर्ध्वाधोनालमन्योन्यमिलत्कोमलसद्दलम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमे समस्त प्राण-शक्तियो के आधारभूत (पुरीतत् नामक तीन हृदयकमलयन्त्रो का, जो
नालयुक्त संपुटित तीन कमल-जोड़ के सदश ओर पृथक्-पृथक् बहत्तर हजार नाडियों के मूल-
जालस्वरूप हैं, दिग्दर्शन कराते हैँ ।
महाराज, उसमें यन्त्र के सदुश तीन कमल के जोड़े हैँ, वे अस्थिमांसमय एवं अत्यन्त मृदु है । उनमें
ऊपर ओर नीचे दोनों ओर से नाल-दण्ड लगे हुए हैं ओर वे संपुटित होकर एक दूसरे से मिले हुए कोमल
सुन्दर दलों से सुशोभित हैं