Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
आस्यप्रधानसुद्वार भुजपार्श्वोपमन्दिरम् ।
दन्तालिकेसरस्रग्भिर्भूषितद्वारकोटरम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस देहरूपी घर का मुख ही सुन्दर प्रधान -द्वार है, दोनों हाथ एवं पार्श्वभाग उसके उप-मन्दिर हैं
यानी उस घर के अगल-बगल में सम्बद्ध अंश (बुर्ज) हैं और दाँतों की पंक्तिरूप बकुल-मालाओं से
उसके प्रधान दरवाजे का विवर निरन्तर सुशोभित हैं