Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
वपुःखण्डाभिपतितं शाखामृगमिवोदितम् ।
न चञ्चलं मनो यस्य तं मृत्युर्न जिघांसति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीररूपी पुष्पित अरण्य प्रदेश में प्रवेश कर दौड-धूप मचानेवाला बलवान
जिसका मन, वानर की नाई, चंचल नहीं है, उसको मृत्यु मारने की इच्छा नहीं करती