Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
एकस्मिन्निर्मले येन पदे परमपावने ।
संश्रिता चित्तविश्रान्तिस्तं मृत्युर्न जिघांसति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मात्मा में विश्रान्ति ही आत्यन्तिक मृत्यु-विजय में हेतु है, ऐसा कहते है ।
जिसने एक निर्मल परम पवित्र ब्रह्मपद में चित्त-स्थिति प्राप्त कर ली है, उसको मृत्यु मारने की
इच्छा नहीं करती