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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

युगंप्रति धियां पुंसां न्यूनाधिकतया मुने । क्रियाङ्गपाठवैचित्र्ययुक्तान्वेदान्त्यराम्यहम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

मुने, मेँ युग-युग में अध्येता पुरुषों की बुद्धियों के न्यूनाधिकभाव के कारण क्रियाओं की (ब्रह्मचर्य, गुरुसेवा, भूमिशयन आदि क्रियाओं की), अंगों की (शिक्षा, कल्प आदि अंगों की) एवं पाठो की (अवधानपूर्वक स्वर, वर्ण आदि के उच्चारण रूप पाठो की) न्यूनाधिकप्रयुक्त विचित्रतता से युक्त वेदों का भी स्मरण करता हूँ