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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

बाणार्थमष्टौ संग्रामाञ्ज्वरप्रमथमन्त्रकान् । विक्षोभितसुरानीकान्त्स्मरामि हरिशर्वयोः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

मुनिवर, बाणासुर के लिए माहेश्वर एवं वैष्णवनामक ज्वरो ओर प्रमथगणों को शौर्य उत्साह बढ़ाकर प्रवृत्त करानेवाले तथा देवताओं की सेनाओं को प्रचुरमात्रा में क्षुब्ध करनेवाले हरि ओर हर के आठ संग्राम हुए-इसका मुझे स्मरण है