Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
एतांश्चान्यांश्च वृत्तान्तान्संस्मरामि बहूनपि ।
किं तेन बहुनोक्तेन सारं संक्षेपतः शृणु ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
ये ओर इनसे पृथक दूसरे भी
बहुत वृत्तान्त हैं, जिनका मुझे संस्मरण है, परन्तु उनके विषय में अधिक कहने से क्या फल ? केवल
सारभूत वस्तु का संक्षेप से श्रवण कीजिए