Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अनगस्त्यामगस्त्याशामेकपर्वततां गताम् ।
मत्ते विन्ध्यमहाशैले संस्मरामि जगत्कुटीम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, एक समय मेरु-स्पर्धा से विन्ध्यमहापर्वत के बढ़ने पर दक्षिण दिशा से अगस्त्य महामुनि
चले गये ओर यह जगत-रूपी कुटिया मलय, दर्दुर, सह्याद्रि आदि विभाजक पर्वतो के अभाव से
एकपर्वतरूपता को प्राप्त हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है