Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
मेरुरत्नतलोद्योतैरर्धप्रकटकोटरम् ।
लोकालोकमिवाक्याढ्याद्रिभुवनं संस्मराम्यहम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
सुमेरुपर्वत के रत्नों के तलप्रकाशों से
इस पृथ्वी का आधा कोटर प्रकाशित होता था तथा इस पर कहीं-कहीं प्रकाशयुक्त पर्वत भी विद्यमान
थे, इसलिए यह लोकालोक पर्वत के सदृश प्रतीत होती थी - इसका भी ठीक-ठीक स्मरण है