Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अनुत्पन्नदिवाधीशामशक्तशशिमण्डलाम् ।
अविभक्तदिवालोकां संस्मरामि धरामधः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
पहले मेरुपर्वत के नीचे पृथ्वी पर न सूर्य उत्पन्न हुआ था,
न इसमें चन्द्र-मण्डल का भान ही होता था ओर न तो दिवस का हेतुभूत प्रकाश सुमेरुपर्वत के प्रकाश
से विभक्त था-इसका भी मुझे भली प्रकार से स्मरण है