Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
ब्रह्मन्नियतिरेषा हि दुर्लङ्घ्या पारमेश्वरी ।
मयेदृशेन वै भाव्यं भाव्यमन्यैस्तु तादृशैः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस विषय में तत्-तत् प्रबल प्रारब्ध का अनुसरण करनेवाली सत्यसंकल्प स्वरूपा ईश्वरनियति
ही व्यवस्थापक है, दूसरा कोई नहीं: ऐसा कहते हैं।
भुशुण्ड ने कहा : हे ब्रह्मन्, चूँकि इस परमेश्वरीय नियामिका शक्ति का कोई भी उल्लंघन नहीं कर
सकता, इसलिए हम इस प्रकार कल्पान्तों में स्थित रहते हैं और दूसरे (योगी) शरीरों का त्यागकर
मुक्त हो जाते हैं