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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 128, Verse 111

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 128, verse 111 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 111

संस्कृत श्लोक

य इमं श्रृणुयान्नित्यं विधिं रामवसिष्ठयोः । सर्वावस्थोऽपि श्रवणान्मुच्यते ब्रह्म गच्छति ॥ १११ ॥

हिन्दी अर्थ

जो कोई इस वसिष्ठ ओर श्रीरामचन्द्रजी के संवाद प्रकार को प्रतिदिन सुनेगा, वह मोह-मालिन्य-राग-द्रेष- महापातक ओर उपपातक आदि सब दोषों से युक्त अवस्थाओं में रहते हुए भी एकमात्र श्रवण से ही सब दोषों से मुक्त हो जायेगा ओर शान्तिआदिगुणों की प्राप्ति द्वारा ब्रह्म को प्राप्त कर लेगा, फिर अधिकारी पुरुष के लिए तो कहना ही क्या