Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अथवा साधुसंगत्या वैराग्यं नाभ्युदेति हि ।
वैराग्येऽभ्युदिते जन्तोरवश्यं भूमिकोदयः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य उत्पन्न हो जाने पर प्रथम भूमिका का उदय
प्राणी को अवश्य होता है और तदनन्तर उसका संसार नष्ट हो जाता है, यही शास्त्रों के अर्थो का
संग्रह है शास्त्रों का परम सिद्धान्त है