Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तृतीयां भूमिकां प्राप्य बुधोऽनुभवति स्वयम् ।
द्विःप्रकारमसंसङ्गं तस्य भेदमिमं शृणु ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
'असंगता के सुख से सौम्य” इस उक्ति की विभाग कर व्याख्या करते हैं।
तीसरी भूमिका में पहुँचकर ज्ञानी पुरुष दो तरह के असंग का स्वयं अनुभव करता है । हे श्रीरामजी,
आप उसके इन भेद को सुनिये