Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
समस्तसंकल्पविलासमुक्तं तुर्ये पदे तिष्ठ निरामयात्मा ।
यत्र स्थिताः साधु सदैव मुक्ताः प्रशान्तमेदा मुनयो महान्तः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
रामचन्द्रजी, समस्त संकल्पों के विलासों से मुक्त उस तुर्यपद में अपनी सांसारिक आत्मा को सब
विकारों से शून्य बनाकर आप स्थित रहिये; जिसमें भलीभाँति स्थित रहकर अनेक बड़े-बड़े मुनिजन
भेद को शान्त करके सदा ही मुक्त हो चुके हैं