Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 121, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 121, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरुणा यद्यत्कर्तुं समुद्यताः ।
तदहं चिद्वपुः सर्वं करोमीत्येव भावयेत् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवात्मा जगत् का तो कर्ता है नहीं, फिर वह परमेश्वररूप कैसे बन जायेगा ? इस शंका पर
कहते हैं ।
ब्रह्मा, इन्द्र, विष्णु और वरुण जिस-जिस वस्तु का निर्माण करने के लिए उद्यत हैं, उन सबका
चिद्रूप मैं ही निर्माण करता हूँ, ऐसी भावना करनी चाहिए