Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 119, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 119, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
स्वयमस्य तथा शक्तिरुदेत्याबध्यते यया ।
स्वयमस्य तथा शक्तिरुदेत्युन्मुच्यते यया ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
राग से प्रवृत्त हुए चेतन में जैसे सृष्टिशक्ति का उदय अपने आप होता है वैसे ही वैराग्य से निवृत्त
हुए चेतन में संहारशक्ति का उदय भी अपने आप ही होता है, इसे कहते है।
राग से प्रवृत्त इसमें स्वयं ही ऐसी शक्ति उत्पन्न हो जाती है, जिससे कि यह संसार के बन्धन में
फस जाता है तथा स्वयं ही वैराग्य से निवृत्त हुए उसमें ऐसी भी शक्ति उत्पन्न हो जाती है जिससे कि
यह मुक्त हो जाता है