Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 111, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 111, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
सर्वत्र सर्वदा सर्वप्रकाशं सर्वजन्तुषु ।
तदेवैकं कचत्यम्बु विलोलास्वब्धिवीचिषु ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
है, यह कहते हैं ।
सभी जगह ओर सभी प्राणियों मे निरन्तर सब ओर से प्रकाश करनेवाला वही एक आत्मवस्तु उस
प्रकार चमकता है, जिस प्रकार चंचल, समुद्र की तरंगों मेँ जल ही जल चमकता हे