Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 110
एक सौ नौवाँ सर्ग समाप्त एक सौ दसवाँ सर्ग संकल्प की सेना और हाथी के साथ वे दोनों अपने नगर में आ गये तथा चिरकाल तक राज्य करने के बाद वे दोनों विदेहमुक्ति को प्राप्त हो गये, यह वर्णन ।
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- Verses 1–3महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, रात बीत जाने पर पिटारी से निकले हुए जगत् के प्रका…
- Verses 4–8चूडाला द्वारा वन में यों कहने पर ठीक है, ऐसा ही करता हूँ - इस तरह बोल रहे राजा शिखिध्वज न…
- Verses 9–17तदनन्तर पट्टाभिषेक न होने के कारण द्वारपाल के स्थान पर बड़े विनय के साथ स्थित उस मानिनी च…
- Verses 18–21उस महेन्द्र पर्वत से राजा शिखिध्वज चल पडा रास्ते में पर्वतो, अनेक देशों, नदियों ओर जंगलों…
- Verses 22–29नगर की स्त्रियों द्वारा जिसके ऊपर लाजांजलियों ओर पुष्पांजलियों से वृष्टि की गई थी, ऐसे उस…
- Verse 30श्लोक के पूवर्धि से शिखिध्वज की स्थिति का अनुवाद करके उत्तरार्थ से उसी स्थिति का रामचन्द्…