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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

त्वमविद्यालतामेतां प्ररूढां हृदयद्रुमे । ज्ञानाभ्यासविलासासिपातैश्छिन्धि स्वसिद्धये ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव पुनः-पुनः उपदेश ओर मनन आदि के अभ्यास की, अविद्या की, अविद्यारूपी लता की अनेक शाखाओं के छेदन द्वारा सार्थकता है, इस आशय से उपसंहार करते है । हे श्रीरामजी, हृदय -वृक्ष पर लिपटी हुई इस प्रबल अविद्यारूपी लता को ज्ञानाभ्यासरूपी विलास की तलवार के प्रहारो से स्वस्वरूप की सिद्धि के लिए आप काट डालिए