Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तदतद्भावरूपेयं तथा प्रकृतिरात्मनः ।
इदं हि जीवभूतात्म जडरूपमिदं भवेत् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
मायिक स्वभाववश ही जीव और जड़रूप भेद की कल्पना है, इस आशय से कहते हैं ।
थह जीवभूत आत्मा है, यह जड़भूत पदार्थ है ' इस प्रकार का मोह अज्ञानात्मा को ही होता है,
ज्ञानात्मा को को कभी नहीं होता