Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यदिदं किंचिदाभोगि जगज्जालं प्रदृश्यते ।
तत्सर्वममलं ब्रह्म भवत्येतद्व्यवस्थितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी निश्चय को कहते हैं।
श्रीरामजी, को कुछ भी यह भोग्य जगज्जाल दिखाई पड़ता है, वह सब मायिक अव्यवस्थित स्वरूप
का परित्याग कर परमार्थ स्वरूप में अवस्थित, निर्मल ब्रह्मस्वरूप ही हे