Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 89
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 89 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 89
संस्कृत श्लोक
एवं रूपं परित्यज्य सङ्गं स्वात्मविकारदम् ।
यदि तिष्ठसि निर्व्यग्रः कुर्वन्नपि न लिप्यसे ॥ ८९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, अपनी आत्मा में विकार पैदा करनेवाले
उक्त स्वरूप के संग का त्यागकर यदि आप स्वस्थ होकर स्थित रहें, तो व्यवहार में व्यस्त होते हुए
भी आप उससे लिप्त नहीं होगे