Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 81
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 81
संस्कृत श्लोक
सङ्गः कारणमर्थानां सङ्गः संसारकारणम् ।
सङ्गः कारणमाशानां सङ्गः कारणमापदाम् ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
इन पूर्वोक्त वाक्यो से यह निष्कर्ष निकला कि आसक्तिपूर्वक पदार्थो का अनुभव करना ही
बन्धन में हेतु है, वह आसक्तिशून्य ज्ञानी को होता नहीं, इस आशय से कहते है ।
आसक्ति ही संसार की कारण है, आसक्ति ही समस्त पदार्थो की हेतु है, आसक्ति ही रम्य
विषयों की अभिलाषाओं की जनक हे ओर आसक्ति ही समस्त विपत्तियों की उत्पादिका हे