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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 80

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 80 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 80

संस्कृत श्लोक

देशान्तरस्थचेतोभिरेतदात्मगृहस्थितैः । अप्रौढमतिभिः साधु मूर्खैरप्यनुभूयते ॥ ८० ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र जिनका मन अन्यत्र चला गया है, ऐसे अपने घर में रहनेवाले मूर्ख एवं अप्रोढमति बालक, पशु आदि इस विषय का यानी देख रहा भी नहीं देखता आदि उक्त अर्थ का अनुभव करते हैं, इस विषय में उनको किसी प्रकार का विवाद नहीं है