Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
सर्वसंकल्पसीमान्ते विश्रान्ता ये परे पदे ।
तेषां लब्धस्वरूपाणां मेरुरेव तृणायते ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त संकल्पो की सीमा के अन्तभूत परम पद में जो महानुभाव विश्रान्ति
कर चुके हैं, उस प्राप्त स्वरूप महात्माओं की दृष्टि में मेरु पर्वत ही तृण के सदुश है