Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
द्विषद्भेरीनिनादेन पटहारणितेन च ।
कटुकोदण्डघोषेण न विभेति मनागपि ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, राग आदि सैकड़ों दोषों से झुलस गये वे आत्मस्वरूप नहीं जान पाते और उनमें से कोई
लोग ही कभी दैववश आत्मस्वरूप जान पाते हैं