Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
कौशेयदलजालेषु चन्द्रबिम्बकलादिषु ।
कल्पपादपकुञ्जेषु देहशोभाविलासिषु ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
इन सुन्दर युक्तियों के रहते जो पुरुष हठयोग से चित्त को वशीभूत करना चाहते हैं,
उनके लिए मेरा यही मत है कि वे दीपक का परित्याग कर अंजनों से अन्धकार का निवारण करना
चाहते हैं (एक बात यहाँ यह जान लेनी चाहिए, वह यह कि पहले बतलाया गया प्राणनिरोध भी
दुर्दान्त मन के दमन में हेतु होने से एक तरह का हठरूप उपाय ही है, तथापि सत्-शास्त्र ओर
सद्गुरु से बोधित मार्ग से शून्य जो दूसरे उपवेशन, शयन, शरीरशोषण, मन्त्र, यन्त्र श्मशानसाधन
आदि साहसस्वरूप हठात्मक उपाय है, उन्हींका यहाँ निवारण किया गया है)