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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verses 35–36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verses 35–36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 35,36

संस्कृत श्लोक

केषुचिन्नानुबध्नाति तृप्तमूर्तिरसक्तधीः । आस्वादनरतिर्विप्रः स्वशरीरलवेष्विव ॥ ३५ ॥ ज्ञानवान्यमचन्द्रेन्द्ररुद्रार्कानिलसद्मसु । मेरुमन्दरकैलाससह्यदर्दुरसानुषु ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसीका दिग्दर्शन करते हैं । अध्यात्मविद्या की प्राप्ति, साधुसंगति, वासना का परित्याग और प्राणस्पन्दन का निरोध ये ही युक्तियाँ चित्त के ऊपर विजय पाने के लिए निश्चित रूप से पुष्ट उपाय हैं । इनसे तत्काल ही चित्त उस प्रकार विजित हो जाता है, जिस प्रकार जलधाराओं से भूमि की धूलि विजित हो जाती है