Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

येन शास्त्रविचारेण ब्रह्मतत्त्वं प्रबुद्ध्यते । तद्भानमुच्यते ज्ञेयादभिन्नमिव संस्थितम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमान्‌ पुरुष के द्वारा एक साथ तत्‌-तत्‌ कार्यो मेँ योजित हुए वासनाक्षय आदि संसाररूपी सागर को उस प्रकार विशीर्णं कर देते हैं, जिस प्रकार जलप्रवाह पर्वततट को विशीर्णं कर देते हैं