Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ज्ञाने प्रकटतां याते ज्ञेयं व्ययमुदेत्यलम् ।
रवावभ्युदिते भूमावालोक इव निर्मलः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पारितोषिक आदि से स्वाधीन बनाकर दीर्घकाल तक तत्-तत् कार्य में प्रेरित भी
सेना के वीर योद्धा लोग एक एक करके अपने स्वामी राजा के अभिमुख जाने में समर्थ नहीं होते,
वैसे ही बुद्धिमान् पुरुष के द्वारा दीर्घकाल तक सेवा आदि से स्वाधीन कर तत्-तत् कार्यो मे योजित
भी ये वासनाक्षय आदि एक एक करके अपने स्वामी परमात्मा के पास जाने में समर्थ नहीं होते