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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

क्व प्राप्तभूतिको धीरो ज्ञातज्ञेयो विवेकवान् । आक्रान्तः किल विक्रान्तोविषयेन्द्रियदस्युभिः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

असौकर्य का उपपादन करने के लिए परस्यराधीनत्व का उपपादन करते है । जब तक मन नष्ट नहीं होता, तब तक वासनाका विनाश नहीं होता ओर जब तक वासना विनष्ट नहीं होती, तब तक चित्त की शान्ति नहीं होती