Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 95
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 95 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 95
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, संवित्-रूपी
जलसंतति के द्युलोक, पृथ्वी, वायु, आकाश, पर्वत, नदियाँ, दिशाएँ ये सब तरंग हैं